Tuesday, 4 May 2010

क्या भारत की इस दसा से आप सनतुषट है

बड़ा अफसोस होता है जब इतने बड़े भारत में कोई ज्ञान प्राप्त करने की बात करता है परन्तु ज्ञान दाता नहीं मिलता वैसे ऐसा नहीं लोगो के मनो में कुछ नहीं है मनों में तो बहुत कुछ है परन्तु सही समय पर अपने ज्ञानार्जन का बखान नहीं करते है और जब ज्ञान चाहने की इच्छा नहीं होती तो ज्ञान का भण्डार कानो को चैन नहीं लेने देता मानो ऐसा लगता है कि सारे बंुद्विजीवी इकठठे हो गये हो और ज्ञानार्जन कराकर ही चैन से बैठेगे।यह बात मै यूॅं ही नहीं कह रहा हूॅं इसका साक्षात प्रमाण है ट्ेन यात्रा या बस यात्रा या और कोई स्थान अथवा सार्वजनिक स्थान आप या मैं किसी कारण वश यात्रा कर रहे हो और यदि कोई विषय छिड़ जाये तो उस विषय पर ज्ञान की उल्टी करने वालो की लाइन लग जायेगी उन्हे यह तनिक भी आभास नहीं होगा कि इस कम्पार्टमैनट में विभिन्न यात्री यात्रा कर रहे है और कोई यात्री बीमार अथवा छात्र अथवा अन्य परिस्थिति जन्य व्यक्ति हो सकता है जिसे उनके ज्ञानार्जन की उल्टी बू फैलाकर सारे माहोल को दूषित करने की आवश्यकता न हो अनावश्यक रुप से उसके कानो पर यह बुद्धिजीवी अत्याचार कर रहे हो परन्तु उसे तो सहना है क्योकि समूह है और इस समय समूहरुप में क्रियान्वित है और हम निपट अकेले।तो जरा सोचिये कि वह ज्ञान अच्छा है जो लोगो को कष्ट पहुॅचाये अथवा यह ज्ञान अच्छा है जिससे कि ब्लाग जगत के पाठक अथवा अन्य लोग लाभान्वित हो भारत की दशा पर विचार कर सक इस मुहिम को जारी रख सके कोई भी मुहिम तभी सफल होती है जब लोगो की सहभागिता हो अन्यथा न जाने कितने लोगो ने एक प्लेटफार्म पर आने की बात की परन्तु एकप्लेटफार्म पर नहीं आ सके और सबने अपने अपने प्लेटफार्म पर अपनीःअपनी खिचड़ी पकायी क्या कभी आपने सोचा कि बहुमत से ज्यादा एकमत होना आवश्यक है और वर्तमान में यह परमआवश्यक हो जाता है कि हमएकमत हो अन्यथा मतो की इस उलटफेर में हम पर अत्याचार होते रहेगे और हम यात्री रुप में उनको न चाहते हुए भी मजबूरी वश झेलते रहेगे क्योकि वह बहुमती है और हम निपट अकेले तो तो भइया कहीं पर (किसी विषय पर तो एकमत होईए जिससे कि इन बहुमत वालो के अत्याचार रुक सके)तो एकमत हो जाइये और चन्द लाइने लिखकर उन एक को दो कीजिये देखते है कि इस ज्ञान की सुगन्ध अथवा दुर्गन्ध का आप पर कुछ प्रभाव पड़ा अथवा नहीं

1 comment:

  1. ऐसे होगा खुशहाल, स्वावलम्बी और शक्तिशाली भारत का निर्माण: एक घोषणापत्र- http://khushhalbharat.blogspot.com/

    ReplyDelete